रविवार, 12 अप्रैल 2026

जाने की तैयारी

 हम नीदरलैंड के प्रसिद्ध ट्यूलिप उद्यान घूमने गये थे। हम सुबह दस बजे के करीब पहुंच गये थे। अप्रैल महीने की शुरुआत थी और ट्यूलिप खिल गये थे रंग बिरंगे। कुछ चेरी के वृक्ष अब भी फूलों से लदे थे। यह धरती के सुंदरतम नज़ारों में एक था। मन आनंद और उत्साह से भरा सब कुछ देख लेना चाहता हो हर‌ रंग को आंखों से पी अपने अस्तित्व का हिस्सा बना लेना चाहता हो। दोपहर होते-होते मन और शरीर थकने सा लगा था। 

एक समय तय था जब हमें वहां से चल देना था, ताकि वह बस पकड़ सकें जो हमें वक्त से शिपोल एयरपोर्ट पहुंचा दे ताकि वापसी की फ्लाइट ना छूटे।

एक बार जाने का वक्त करीब हो आया तो मन बस इस पर लग गया कि कौन सा  रास्ता हमें बगीचे से निकालकर बस स्थानक तक ले जाएगा। बगीचे में अभी भी चहल-पहल रंगीन सुंदरता हर तरफ बिखड़ी पड़ी थी, मगर मन तो सिर्फ उन  पहलुओं व रास्तों की सोच रहा थ जो हमें वहां से बाहर अपनी मंजिल तक ले जा सके।

अब तो जाना ही है पर थोड़ा वक्त हाथ में है ऐसा जान किसी वृक्ष तले बैठ गया। निर्विकार भाव से हरी दूब चमकती धूप, रंग बिरंगे फूल और घूमने लोगों को देखने लगा। ऐसा लगा कि वहां होकर भी मैं उनसे अलग और परे हूं। सुबह आते वक्त का उत्साह और आनंद अब शांत और सौम्य हो चुका था। घड़ी की सूइयों  ने 2:45 का वक्त दिखाए, और हम चल दिये। अब रुक पाने का विकल्प ही नहीं था।

ज़िन्दगी ऐसी ही है