शनिवार, 12 जुलाई 2014

ऑक्सफ़ोर्ड और श्रीमद्भगवद गीता


ऑक्सफ़ोर्ड और कैंब्रिज ब्रिटेन ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में शिक्षा के प्रमुख केन्द्रों में से एक हैं.   मुझे याद नहीं है कि  कैसे मैंने पहली बार जाना था की ऑक्सफ़ोर्ड स्थित OCHS  के बारे मे।  यह है- ऑक्सफ़ोर्ड सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज।
यह ऑक्सफ़ोर्ड से जुड़े कई शिक्षाविदों द्वारा  चलाया जाने वाला एक केंद्र है जो हिन्दू धर्म और इसकी संस्कृति के अध्ययन में रत है.  समय समय पैर यह लंदन और अलग अलग शहरों में हिन्दू धर्म के विषयों पर शैक्षणिक  वार्ता का भी आयोजन करता रहता है.  कुछ वर्ष पूर्व  इसने अमिताभ बच्चन को आमंत्रित कर उन्हें सम्मानित भी किया था।

OCHS के द्वारा आप हिन्दू धर्म से जुड़े कई विभिन्न विषयो पर  ऑनलाइन पाठ्यक्रम में भी शामिल हो सकते हैं, मगर यह निशुल्क नहीं है. पिछले साल मैंने वेद और उपनिषद के  पाठ्यक्रम में शामिल भी हुआ था।  

इस साल मैंने भगवद गीता के अध्ययन का चुनाव किया है. यहाँ थोड़ा फर्क है की आप गीता का अध्ययन सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि शैक्षणिक विश्लेषक के दृष्टिकोण से कर रहे होते हैं.


श्रीमान निक  Sutton  इस कोर्स के प्रमुख प्राध्यापक  हैं.  एक इंग्लिश व्यक्ति की हिन्दू धर्म के ऊपर इतनी गहरी पकड़ बेहद प्रभावित करती है.  कई बार मैं उनके दृष्टिकोण से पूरी तरह सहमत नहीं हो पाता  हूँ क्योंकि  एक हिन्दू धर्मावलम्बी होने के कारण  मेरी अपनी धारणाएं हैं जो की शिक्षाविदों के दृष्टिकोण से विपरीत हो सकती है.  उदहारण के तौर पर - मेरे लिए यह बिलकुल ही मुश्किल है मान पाना कि गीता बौद्ध धर्म के उदय के उपरांत रची गई थी।  मैं अब भी इसके पक्ष और विपक्ष के प्रमाण ढूंढने की कोशिश कर रहा हूँ.  कई बार कोई ऐसी बात सुनते ही लगता है कि यह पाश्चात्य विद्वानों की पूर्वाग्रहग्रस्त मानसिकता  का प्रमाण है बस और कुछ नही. मगर हमारा यह दृष्टिकोण सकारात्मक नही है बल्कि हमें भी प्रमणिकता के आधार पर अपनी धारणा बनानी चाहिए. हालाँकि मैं अब भी इससे सहमत नहीं हूँ.
खाई आप को भी अगर वक्त मिले तो OCHS के वेबसाइट पर जरूर आएं और श्री निक सुट्टों  को जरूर सुनें. प्रस्तुत है यह लिंक :
http://www.ochs.org.uk






5 टिप्‍पणियां:

  1. गीता जीने की कला सिखाती है ।

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  2. मैंने भी यही देखा है कि हमारे धर्म-ग्रंथ हमारे लिए सिर्फ़ धर्म (सीमितअर्थों में) स्थूल और बाह्य आचार बन गये ,जब कि धर्म सामान्य रूप से जीवन-व्यापी स्वभाव का बोधक होना चाहिए. बाहर के लोग उसका अध्ययन मनन,करते समय अपनी मौलिक दृष्टि से मूल्यांकन करते हैं ,हमारे दृष्टिकोण से भिन्न हो कर भी उनमें जानने की उत्कंठा और मानने की उदारता है.धर्म जीवन के लिए है मुझे लगता है जीवन धर्म के लिए नहीं (ज़रूरी नहीं कि मैं ही सही होऊँ ).

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  3. श्रीमद्भगवत गीता सभी पुराणों, ग्रंथों महाकाव्यों में सबसे श्रेष्ठ है. यह हमें जीने की कला सिखाती है. यह पढ़कर, सुनकर अच्छा लगता है कि विदेश में भी गीता को लेकर बहुत प्यार और श्रद्धा है. विदेशों में भी लोग हिन्दू धर्म और संस्कृति के प्रेमी हैं. मेरे विचार से जीवन के प्रति अपने दार्शनिक दृष्टिकोण के कारण गीता भारत में ही नहीं विदेशों में भी लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित कर रही है.
    ब्लॉग पर टिप्पणी के लिए आभार...आते रहिएगा....

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  4. आपने लिखा...
    और हमने पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 03/01/2016 को...
    पांच लिंकों का आनंद पर लिंक की जा रही है...
    आप भी आयीेगा...

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