मंगलवार, 6 मार्च 2012

रंग भरी होली: बहुरंगी दुनिया





हर कोई अपनी जंग लड़ रहा है. इसमें साथी की भी खोज होती है, और दुश्मन भी पहचाने जाते हैं. भय और शक से धुंध हुई दृष्टि दोस्त और दुश्मन को पहचानने में भूल करती है. फिर पश्चाताप होता है 

हम अपनी पहचान खोज रहे होते हैं और अक्सर इस खोज में - कुछ अपना बनाने के क्रम में काफी कुछ गवां देते हैं, पराया मान लेते हैं. कुछ बचाने की  चाहत में काफी कुछ मिटा डालने   को तैयार हो जाते हैं. अंत में पश्चाताप होता है. 


अपने से अलग जो है उसे स्वीकार करना उसकी पूरी इज्ज़त   के साथ, ये ही गारंटी है हमारी इज्ज़त और वजूद  के बचे  रहने  की. कोई मज़ा नहीं एक रंगहीन दुनिया का. 


यकीन रखना होगा कि जो सच  और सुन्दर है वही बचेगा, शेष काल के ग्रास बनेंगे, और मोह रख  कर भी हम उसे बचा न पाएंगे.


हम सहज हों . कुछ पराया नहीं, सब कुछ हमारी ही विरासत है, विभिन्नता ही सौंदर्य को जीवित रखती है. हम और हमारा समाज सुन्दर हो. एकरंग नहीं - चाहे लाल या हरा. होली की  शुभकामनायें - ढेरों   रंगों भरी.












5 टिप्‍पणियां:

  1. सबमें रम जायें, सब अपने में रमने दें..होली की शुभकामनायें..

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    1. धन्यवाद ! आपको भी होली की हार्दिक शुभकामनायें !

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  2. .
    होलिकोत्सव की अनेकानेक हार्दिक शुभ-कामनाए!

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    1. होली की शुभकामनायें - ढेरों रंगों भरी.

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