गुरुवार, 16 सितंबर 2010

डेंगू विषाणु जनित रोग है। अतः इसके उपचार में antibotics क़ी कोई भूमिका नहीं है।
डेंगू मच्छड़ के काटने से होता है। इन मच्छड़ को Aedes egypti कहते हैं ये दिन में काटने वाले मच्छड़ होते हैं। आम तौर पर ये आस पास जमे पानी में पैदा होते हैं। मच्छड़ के काटने के ७-१२ दिनों बाद बिमारी के लक्ष्ण दीखने लगते हैं।
डेंगू संक्रमण से जो लक्षण या बिमारी मरीज़ में होती है वह विभिन्न रूप क़ी हो सकती है। और इसलिए अलग अलग लोगों में यह बिमारी अलग रूप में दिखेगी। निम्नाकित तरह क़ी डेंगू हो सकती है-
  1. सामान्य वाइरल बीमारी - इसमें २-3 दिनों का सामान्य बुखार और बदन दर्द होता hai। कई बार तो डेंगू होने का शक भी नहीं होता। paracetamol ( crocin, calpol ) क़ी १-२ खुराक काफी है।
  2. डेगू बुखार - तेज बुखार २ से ७ दिनों तक। साथ में तेज बदन,, सर दर्द , आँखों के पीछे दर्द, जोड़ों का दर्द। कई बार त्वच पर दाने भी आ सकते हैं। इसमें भी कुछ ख़ास नहीं कर सकते - आराम, paracetamol, और पर्याप्त तरल आपूर्ति ही इलाज का आधार है। paracetamol का सही dose है वयस्क ke लिए ५०० मिलीग्राम -१ ग्राम हर 6 घंटे पर aur बच्चों के लिए १५ मिलीग्राम प्रति किलोग्राम वजन ke लिए हर ६ घंटे पर। कई बार इस बुखार के दौरान नाक, मसूड़ों से खों भी आ सकता है।
  3. Dengue hemorrhagic fever (DHF) : अब मामला गंभीर हो रहा है। यह बुखार के शुरू होने के ५-७ दिनों बाद शुरू होता है। शरीर के अन्दर डेगू विषाणु के विरुद्ध antibodies बनते hai जो हमारे रक्त नलिकाओं से प्रतिक्रिया कर उन्हें ऐसा कर देते हैं क़ी उनसे प्लाज्मा (रक्त का तरल पदार्थ) का स्राव हमारे शरीर कe ही अन्दर होने लगता है. फलतः रक्तचाप (BP) में गिरावट आने लगती है। ऐसी हालत में मरीज़ को भर्ती होना चाहिए और इलाज है पानी चढ़ाना ( IV fluids)
  4. डेंगू shock syndrome (DSS) : यह DHH का ही बढ़ा हुआ रूप है । डेगू से जो भी मौत होती है वह इसी के वज़ह से होती है। जो मरीज इस हालत में पहुँचते हैं उनका इलाज़ कठिन होता है, मगर अच्छी Intensive केयर सुविधा होने से इन्हें बचाया जा सकता है।

तो आप समझ सकते हैं क़ी अधिकतर लोगों को डेंगू का संक्रमण कुच्छ ख़ास नुक्सान नहीं पहुंचता है मगर दुर्भाग्यवश कुछ लोगों में समस्या गंभीर हो सकती है। बहुत ज़रूरी है क़ी हम उन गंभीर मरीजों को जल्दी पहचान सकें और उनका समय रहते इलाज शुरू हो सके। इसके लिए आम जानता में भी जागरूकता होनी चाहिए। कई बार शायद आपको ही स्वस्थ्य कर्मचारी से कहना पर सकता है क़ी क्या यह डेंगू है।

रक्त जांच: Full blood काउंट में हिमोग्लोबिन बाधा हो सकता है और प्लेटलेट कम ho सकता hai। हिमोग्लोबिन का ज्यादा होना और प्लेटलेट का कम होना DHH क़ी पहली निशानी हो सकती है।

यह था एक बेहद संक्षिप्त विवरण।

मूल बातें है:

  • दिन में काटने वाले मच्छड़ों से बचें। आस पास पानी न जमा होने दें।
  • डेंगू क़ी बिमारी मूलतः बारिश के बाद अगस्त -नवम्बर में फैलती है।
  • साधारण डेंगू के लिए आराम, paracetamol, और तरल आपूर्ति से जयादा कुछ नहीं चाहिए।
  • अगर ४-५ दिनों में मरीज़ क़ी हालत नहीं अच्छी हो रही है तो सावधान। डॉक्टर से मिलें और बताएं क़ी आपको डेंगू का शक है।

आशा है ये जानकारी कुछ काम क़ी होगी।

धन्यवाद .

7 टिप्‍पणियां:

  1. ham to dengu ko giloy aur ajwaain se hi rok dete hain aur khatm bhi kar dete hain

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  2. o bhai sahab, is jankari ko aap kuchh kaam kyn kahte ho, are bhaiya ye vadde kaam ki hai ji, dher sara thanku hai ji aapko. pehli baar aaya aapke blog par, muaafi itni der se aane ke liye

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  3. बहुत अच्छी और जानकारी परक पोस्ट.....
    इतने विस्तार बताने के शुक्रिया......

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  4. सामयिक और उपयोगी जानकारी। कई बार हम पैसा रहने पर भी नहीं बच सकते। ऊपर वाले का शुक्रिया।

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  5. महानगरों में भी डेंगू से लोग मर रहे हैं। छोटे शहरों की तो बात ही क्या!

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